tumhaara aise ghar jaana bahut takleef deta hai | तुम्हारा ऐसे घर जाना बहुत तकलीफ़ देता है

  - Abdullah Minhaj khan
तुम्हाराऐसेघरजानाबहुततकलीफ़देताहै
लड़ाईहमसेकरजानाबहुततकलीफ़देताहै
ब-ज़ाहिरइश्क़काइज़हारकरतोलेतीहैलेकिन
मगरउसकामुकरजानाबहुततकलीफ़देताहै
वोजिसनेमुझकोहरइकमोड़पेआकरसँभालाहै
अबउसकायूँँबिखरजानाबहुततकलीफ़देताहै
बुलंदीसेउतरकरकोईभीमरतानहींलेकिन
निगाहोंसेउतरजानाबहुततकलीफ़देताहै
जहाँसेचलकेमीलोंगएहैंसू-ए-मंज़िलहम
पलटकरफिरउधरजानाबहुततकलीफ़देताहै
किसीसेइश्क़मेंमिनहाजदुश्वारीनहींलेकिन
मगरहदसेगुज़रजानाबहुततकलीफ़देताहै
  - Abdullah Minhaj khan
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy