akelaa ko bhi aati hai hañsi kya | अकेले को भी आती है हँसी क्या

  - Ajit Singh Badal
अकेलेकोभीआतीहैहँसीक्या
किसीकीयादनेकीगुदगुदीक्या
नज़रआनेलगेहरहालमेंतुम
हमेंअबक्याअँधेरारौशनीक्या
येकम-कमराब्ताभीख़त्मसमझूँ
यहीहैआपकाख़तआख़िरीक्या
बनेजबतकसाँसोंकातवाज़ुन
नचाऊँउँगलियोंपरबाँसुरीक्या
वकालततेरापेशाहैतो'बादल'
करेगाझूटकीभीपैरवीक्या
  - Ajit Singh Badal
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