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Jonty nain
main jitna bhi kamata hooñ
main jitna bhi kamata hooñ | मैं जितना भी कमाता हूँ
- Jonty nain
मैं
जितना
भी
कमाता
हूँ
मैं
ज़्यादा
ही
गँवाता
हूँ
मैं
लिखकर
मौत
काग़ज़
पर
मैं
उस
काग़ज़
को
खाता
हूँ
जो
बारिश
आते
टूटा
हो
मैं
इक
ऐसा
ही
छाता
हूँ
मैं
बस
ग़ज़लों
को
सुनता
हूँ
मैं
सब
ग़ज़लों
को
भाता
हूँ
शब-ए-फ़ुर्क़त
सुनानी
है
शब-ए-फ़ुर्क़त
सुनाता
हूँ
तू
जितना
भी
कमाता
है
मैं
उतना
तो
उड़ाता
हूँ
- Jonty nain
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बाहरी
भेष
बेहतर
है
दुख
तो
अंदर
ही
अंदर
है
मेरा
दरिया
से
होगा
क्या
खोया
मैंने
समुंदर
है
रात
रौशन
तो
कर
दी
पर
दिन
निकलने
का
अब
डर
है
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Jonty nain
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चाँद
को
तोड़
लाऊँगा
किसी
दिन
रात
को
दूँगा
ये
सज़ा
किसी
दिन
Jonty nain
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एक
शायर
मुझ
में
ज़िंदा
है
एक
'आशिक़
मरता
जाता
है
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उम्र
जाएगी
ये
थकान
में
अब
ज़िंदगी
यानी
इम्तिहान
में
अब
मौत
को
तो
ख़बर
मिरी
है
ये
जान
है
मेरी
उसकी
जान
में
अब
ऐसे
सब
दुख
बरसते
सर
पे
मिरे
छेद
हो
कोई
आसमान
में
अब
इश्क़
को
ज़िंदा
रखने
में
भाई
मर
गया
मेरे
ख़ानदान
में
अब
कैसे
मैं
तेरे
साथ
साथ
चलूँ
धूल
है
तेरे
कारवान
में
अब
क्यूँँ
गुज़ारेगा
ज़िंदगी
दुख
में
कौन
आएगा
इस
मकान
में
अब
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Jonty nain
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जिस्म
को
तो
ले
जाएगा
वो
अपने
पर
कमरे
से
उसका
साया
नहीं
जाएगा
Jonty nain
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