hai jamaal-e-husn ka partav sanam-khaana kahii | है जमाल-ए-हुस्न का परतव सनम-ख़ाना कहीं

  - Aish Meeruthi
हैजमाल-ए-हुस्नकापरतवसनम-ख़ानाकहीं
बुत-कदाका'बाकहींहैऔरमय-ख़ानाकहीं
सीधेरस्तेसेभटकजाएफ़रज़ानाकहीं
जाएअक़्लकीबातोंमेंदीवानाकहीं
येभीकोईज़िंदगीमेंज़िंदगीहैहम-नफ़स
दिलकहींहैहमकहींहैंऔरजानानाकहीं
ताबिश-ए-बर्क़-ए-सितमसेयाइलाहीजलजाए
अंदलीब-ए-ज़ारकागुलशनमेंकाशानाकहीं
फिरदोहराएकहींतारीख़अंजाम-ए-सितम
होजाएसब्रकालबरेज़पैमानाकहीं
उनकेदामनसेलिपटहीजाएगीबसख़ाक-ए-दिल
ज़िदपेजाएअपनाजोश-ए-रिंदानाकहीं
कैसीउजड़ीहैयेमहफ़िल'ऐश'हंगाम-ए-सहर
शम-ए-कुश्ताहैकहींऔरख़ाक-ए-परवानाकहीं
  - Aish Meeruthi
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