har ik shay par bahaar-e-zindagi mehsoos karta hooñ | हर इक शय पर बहार-ए-ज़िंदगी महसूस करता हूँ

  - Aish Barni
हरइकशयपरबहार-ए-ज़िंदगीमहसूसकरताहूँ
मगरबा-ईं-हमातेरीकमीमहसूसकरताहूँ
भटककरभीकभीमंज़िलसेबेगानानहींहोता
किसीकीग़ाएबानारहबरीमहसूसकरताहूँ
मैंअपनेदिलपेरखलेताहूँतोहमतबद-गुमानीकी
अगरतेरीतरफ़सेबे-रुख़ीमहसूसकरताहूँ
येदुनियाअजनबीपहलेभीथीऔरअबभीहैलेकिन
अबअपनेआपकोभीअजनबीमहसूसकरताहूँ
तुम्हेंइसबातकाअंदाज़ाशायदहोनहींसकता
कितुमकोदेखकिकितनीख़ुशीमहसूसकरताहूँ
  - Aish Barni
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