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Faiz Ahmad
sochta hoon ke sab fana kar doon
sochta hoon ke sab fana kar doon | सोचता हूँ के सब फ़ना कर दूँ
- Faiz Ahmad
सोचता
हूँ
के
सब
फ़ना
कर
दूँ
खेंच
के
अपना
दिल
जुदा
कर
दूँ
अब
मोहब्बत
से
नज़रें
फेर
लीं
हैं
तू
मिले
भी
तो
अब
मना
कर
दूँ
- Faiz Ahmad
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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नई
नस्लें
समझ
पाएँ
मुहब्बत
के
मआनी
हमें
इस
वास्ते
भी
शा'इरी
करनी
पड़ेगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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मिरी
मोहब्बत
को
अपने
कमरे
में
बिस्तरों
पे
सजाने
वाले
ये
बद्दुआ
है
कि
तुझको
उसके
बदन
में
लज़्जत
नहीं
मिलेगी
Faiz Ahmad
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किसी
भी
हाल
में
तुझको
नहीं
भुलाऊँगा
मैं
पासवर्ड
तेरे
नाम
का
बनाऊँगा
Faiz Ahmad
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ख़याल
में
भी
कुछ
ऐसे
सजा
रहा
हूँ
तुम्हें
ख़ुदा
की
हूरों
से
आला
बना
रहा
हूँ
तुम्हें
भले
ही
मुझ
को
नहीं
आ
रही
हैं
हिचकियांँ
भी
मगर
मैं
जानता
हूँ
याद
आ
रहा
हूँ
तुम्हें
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Faiz Ahmad
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आपकी
आँखों
की
जो
कर
ले
ज़ियारत
इक
बार
उसका
दिल
फिर
तो
कहीं
और
न
माथा
टेके
Faiz Ahmad
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तुरफ़ा-ओ-चेहरा-ए-तरब
थी
तुम
जीने
का
इक
फ़क़त
सबब
थी
तुम
था
मुलाज़िम
ख़ुदा
का
इस
ख़ातिर
दिल-ए-मज़दूर
की
कसब
थी
तुम
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Faiz Ahmad
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