saath apne kisi mehfil men bithaate nahin hain | साथ अपने किसी महफिल में बिठाते नहीं हैं

  - Faiz Ahmad
साथअपनेकिसीमहफिलमेंबिठातेनहींहैं
अपनाकहतेहैंमुझे,अपनाबतातेनहींहैं
तुमजोकहतीहोयेमुझसेेकिभुलादूँतुमको
जान-ए-जाँपहलीमोहब्बतकोभुलातेनहींहैं
तुमनुमाइशभीकरातेहोबड़ेफ़क्रकेसाथ
हमतोज़ख़्मोंकामुदावाभीकरातेनहींहैं
आइनेसेमिरीचाहतकातूइज़्हारकर
येतोवोराज़हैख़ुदकोभीबतातेनहींहैं
उसनेबतलायानिसाबोंमेंलिखाहै'अहमद'
इकसुख़न-वरसेकभीइश्क़लड़ातेनहींहैं
  - Faiz Ahmad
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