na jaane rabt kya hai furqat se | न जाने रब्त क्या है फ़ुर्क़त से

  - Faiz Ahmad
जानेरब्तक्याहैफ़ुर्क़तसे
घुटनसीहोरहीहैकुरबतसे
तिरामिलनानहींहैमुमकिनपर
मुक़रतारहताहूँहक़ीक़तसे
कितुझ
मेंख़ुदकोभूलबैठाहूँ
कभीख़ुदसेमिलूंगाफुरसतसे
हटातेक्यूँहोतस्वीरेंउसकी
कहूँगाक्यामैंअपनीहिम्मतसे
मिराक्याहीइलाजतुमकरोगे
मुझेनफ़रतहैअबमोहब्बतसे
फ़रिश्तोंकोभीफाँसलेतीहैं
तिरीआँखेंयेअपनीहरकतसे
तुमइतनेप्यारसेबोलाकरो
मैंतोहूँबद-तमीज़आदतसे
नशाक्याकरसकेगाउसकाजो
मोहब्बतकररहाहैशिद्दतसे
मोहब्बतकाहरइकजोमानीथा
निकलबैठावोमेरीक़िस्मतसे
गिलाकरताहैरोज़ख़ुदसे'फ़ैज़'
कितुझकोक्यामिलामोहब्बतसे
  - Faiz Ahmad
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