ye vaqt raushni ka mukhtasar hai | ये वक़्त रौशनी का मुख़्तसर है

  - Ahmad Shanas
येवक़्तरौशनीकामुख़्तसरहै
अभीसूरजतुलू-ए-मुंतज़रहै
शहादतलफ़्ज़कीदुश्वार-तरहै
किताबोंमेंबहुतज़ेर-ओ-ज़बरहै
अभीखुलनेकोहैदरआसमाँका
अभीइज़हारकाप्यासाबशरहै
येदुनियाएकलम्हेकातमाशा
जानेदूसरालम्हाकिधरहै
जोदेखाहैवोसबकुछहैहमारा
जोअन-देखाहैवोउम्मीदभरहै
मैंख़ुदख़ाशाक-ए-गिरवीदाहूँवर्ना
मिरेहाथोंमेंतिनकाशाहपरहै
फिरइसकेब'अदबसहैरानियाँहैं
ख़बरवालाभीख़ासाबे-ख़बरहै
मिरानाराहैजंगलआगजैसा
मिराक़लमाशिकस्ताबाल-ओ-परहै
ज़बाँमेरीसियासतचाटतीहै
किइसकाज़ाइक़ाशीर-ओ-शकरहै
येअंधीप्यासकामौसमहै'अहमद'
समुंदररौशनीकाबे-असरहै
  - Ahmad Shanas
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