jab se main KHud ko kho raha hooñ | जब से मैं ख़ुद को खो रहा हूँ

  - Ahmad Hamesh
जबसेमैंख़ुदकोखोरहाहूँ
करवटबदलकेसोरहाहूँ
येजागनाऔरसोनाक्याहै
आँखोंमेंजहाँसमोरहाहूँ
दुनियासेउलझकेसरपरशायद
अपनीहीबलाकोढोरहाहूँ
येलागऔरलगावक्याहै
अपनावजूदहीडुबोरहाहूँ
अबतकजोज़िंदगीहैगुज़री
काँटेनफ़समेंबोरहाहूँ
हैकुछतोअपनीपर्दा-दारी
जागताहूँसोरहाहूँ
इतनाहैखोटमेरेमनमें
पानीमेंदूधबिलोरहाहूँ
दिल-फ़िगारबे-सबातहस्ती
तेरीहीजानकोरोरहाहूँ
जितनीहैदूरमौतमुझसे
इतनाहीक़रीबहोरहाहूँ
शीराज़ायूँँबिखररहाहै
ख़ुदमेंतबाहहोरहाहूँ
किसरास्तेपरजारहीहैदुनिया
येदेखकेहीतोरोरहाहूँ
जाने'हमेश'ख़ुदकोकबसे
बे-वज्हलहूमेंडुबोरहाहूँ
  - Ahmad Hamesh
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