न दिल से आह न लब से सदा निकलती है

  - Ahmad Faraz
दिलसेआहलबसेसदानिकलतीहै
मगरयेबातबड़ीदूरजानिकलतीहै
सितमतोयेहैकिअहद-ए-सितमकेजातेही
तमामख़ल्क़मेरीहम-नवानिकलतीहै
विसाल-ओ-हिज्रकीहसरतमेंजू-ए-कम-माया
कभीकभीकिसीसहरामेंजानिकलतीहै
मैंक्याकरूँँमेरेक़ातिलचाहनेपरभी
तेरेलिएमेरेदिलसेदु'आनिकलतीहै
वोज़िंदगीहोकिदुनिया'फ़राज़'क्याकीजे
किजिससेइश्क़करोबे-वफ़ानिकलतीहै
  - Ahmad Faraz
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