is shehr-e-tamanna men koi mujh sa makeen hai | इस शहर-ए-तमन्ना में कोई मुझ सा मकीं है

  - Ahmad Abdullah
इसशहर-ए-तमन्नामेंकोईमुझसामकींहै
आँधीमेंचराग़ोंपेजिसेपूरायक़ींहै
उससेेहीमुख़ातिबहूँजोअफ़लाकनशींहै
इसदुनियामेंसुखनामीकोईशयभीकहींहै
ता'बीरभलेछीनलेआँखोंकीबसारत
इकख़्वाबहक़ीक़तमेंहक़ीक़तसेहसींहै
बारिशकीदु'आतूहैतोफिरकोस-ए-क़ज़ामैं
गरतुझसानहींकोईतोमुझसाभीनहींहै
जिसजापेधरारहताथादरवेशकाकासा
दावेसेयेकहताहूँख़ज़ानाभीवहींहै
  - Ahmad Abdullah
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