soo-e-may-kadaa na jaate to kuchh aur baat hoti | सू-ए-मय-कदा न जाते तो कुछ और बात होती

  - Agha Hashr Kashmiri
सू-ए-मय-कदाजातेतोकुछऔरबातहोती
वोनिगाहसेपिलातेतोकुछऔरबातहोती
गोहवा-ए-गुलसिताँनेमिरेदिलकीलाजरखली
वोनक़ाबख़ुदउठातेतोकुछऔरबातहोती
येबजाकलीनेखिलकरकियागुलसिताँमोअत्तर
अगरआपमुस्कुरातेतोकुछऔरबातहोती
येखुलेखुलेसेगेसूइन्हेंलाखतूसँवारे
मिरेहाथसेसँवरतेतोकुछऔरबातहोती
गोहरमकेरास्तेसेवोपहुँचगएख़ुदातक
तिरीरहगुज़रसेजातेतोकुछऔरबातहोती
  - Agha Hashr Kashmiri
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