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Afzal Sultanpuri
dil ki gehraai se main saare sukhun likhta hooñ
dil ki gehraai se main saare sukhun likhta hooñ | दिल की गहराई से मैं सारे सुख़न लिखता हूँ
- Afzal Sultanpuri
दिल
की
गहराई
से
मैं
सारे
सुख़न
लिखता
हूँ
धूप
और
छाँव
है
क्या
सारे
चमन
लिखता
हूँ
- Afzal Sultanpuri
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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कतराते
हैं
बल
खाते
हैं
घबराते
हैं
क्यूँँ
लोग
सर्दी
है
तो
पानी
में
उतर
क्यूँँ
नहीं
जाते
Mahboob Khizan
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गर्मी
लगी
तो
ख़ुद
से
अलग
हो
के
सो
गए
सर्दी
लगी
तो
ख़ुद
को
दोबारा
पहन
लिया
Bedil Haidri
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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वो
सर्दियों
की
धूप
की
तरह
ग़ुरूब
हो
गया
लिपट
रही
है
याद
जिस्म
से
लिहाफ़
की
तरह
Musavvir Sabzwari
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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क्या
करूँँ
इस
ख़्वाब
का
जो
आँख
से
निकला
नहीं
लाठियाँ
मारी
मगर
पत्थर
कभी
पिघला
नहीं
Afzal Sultanpuri
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ख़ुद
को
दिलदार
कर
भी
दो
जानम
इश्क़
इज़हार
कर
भी
दो
जानम
आपकी
याद
आ
रही
हमको
हम
सेे
अब
प्यार
कर
भी
दो
जानम
आपको
देखकर
हुए
पागल
हमको
बीमार
कर
भी
दो
जानम
हो
गए
साल
भर
मिले
हमको
सब
हदें
पार
कर
भी
दो
जानम
अपनी
तुम
गोद
में
सुला
लो
फिर
दर्द
को
तार
कर
भी
दो
जानम
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Afzal Sultanpuri
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कहूँ
जो
कुछ
मेरी
हर
बात
अव्वल
ध्यान
में
रखना
करो
जो
दिल
मगर
तलवार
अपनी
म्यान
में
रखना
Afzal Sultanpuri
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नये
कपड़े
ख़रीदे
जा
चुके
हैं
मुबारक
हो
मुबारक
ईद
तुमको
Afzal Sultanpuri
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न
जाने
कैसे
तुम
किनारा
कर
लेते
हो
जुमा
दो
रकात
में
गुज़ारा
कर
लेते
हो
Afzal Sultanpuri
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