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Afzal Sultanpuri
yahaañ jo hai hamaare roobroo hai
yahaañ jo hai hamaare roobroo hai | यहाँ जो है हमारे रूबरू है
- Afzal Sultanpuri
यहाँ
जो
है
हमारे
रूबरू
है
जिधर
मैं
देखता
हूँ
तू
ही
तू
है
मुझे
अपना
बना
ले
यार
मेरे
हमारी
आख़िरी
ये
आरज़ू
है
जिधर
देखा
उधर
बस
तुम
दिखे
हो
नज़ारा
ये
नज़ारा
चार-सू
है
तुम्हें
तो
देखना
जैसे
इबादत
हमारी
आँख
भी
अब
बा-वज़ू
है
यक़ीनन
कुछ
मिनट
थे
पास
मेरे
मगर
अफ़ज़ल
तुम्हारी
मुश्क
बू
है
ज़रा
सी
बात
से
ही
डर
गया
मैं
मुझे
लगने
लगा
सच
में
अदू
है
- Afzal Sultanpuri
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जिसने
बेचैनियाँ
दी
हैं
मुझे
बेचैन
रहे
मैंने
रो-रो
के
ख़ुदास
ये
दु'आ
माँगी
है
Shajar Abbas
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उम्र
भर
जिसने
न
माँगा
हो
ख़ुदास
कुछ
भी
उस
ने
बस
तुम
से
मोहब्बत
की
दु'आ
माँगी
है
Shadab Asghar
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नाज़-ओ-नख़रे
क्या
उठाए,
क्या
सुने
उस
के
गिले
देखते
ही
देखते
लड़की
घमंडी
हो
गई
देखते
रहने
में
उस
को
और
क्या
होता,
मगर
जो
थी
जान-ए-आरज़ू,
वो
चाय
ठंडी
हो
गई
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Kazim Rizvi
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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मेरी
दु'आ
है
और
इक
तरह
से
बद्दुआ
भी
है
ख़ुदा
तुम्हें
तुम्हारे
जैसी
बेटियाँ
अता
करे
Tehzeeb Hafi
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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कुछ
इस
लिए
भी
तेरी
आरज़ू
नहीं
है
मुझे
मैं
चाहता
हूँ
मेरा
इश्क़
जावेदानी
हो
Vipul Kumar
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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नींव
तो
नींव
है
गड़ी
रहेगी
ये
इमारत
वहीं
खड़ी
रहेगी
Afzal Sultanpuri
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क्या
करूँँ
इस
ख़्वाब
का
जो
आँख
से
निकला
नहीं
लाठियाँ
मारी
मगर
पत्थर
कभी
पिघला
नहीं
Afzal Sultanpuri
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दोस्त
नाराज़
हो
गए
कितने
फाश
जब
राज़
हो
गए
कितने
कोई
अफ़ज़ल
नहीं
मिला
मुझको
जान
अबराज़
हो
गए
कितने
जब
ज़रूरत
पड़ी
हमें
अफ़ज़ल
ये
दग़ाबाज़
हो
गए
कितने
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Afzal Sultanpuri
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ख़ूब
है
दिल
के
इस
दहकने
में
इश्क़
करने
में
फिर
बहकने
में
दिल
परिंदा
कि
जिस
में
चाहत
हो
नाम
लेकर
तिरा
चहकने
में
तुमने
जब
से
गले
लगाया
है
यार
पागल
हुआ
महकने
में
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Afzal Sultanpuri
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अपनी
आँखों
का
नूर
खो
बैठे
जो
मिली
थी
वो
हूर
खो
बैठे
Afzal Sultanpuri
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