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Afzal Sultanpuri
tere pairo'n ki paayal se kabhi ghaayal hua tha main
tere pairo'n ki paayal se kabhi ghaayal hua tha main | तेरे पैरों की पायल से कभी घाइल हुआ था मैं
- Afzal Sultanpuri
तेरे
पैरों
की
पायल
से
कभी
घाइल
हुआ
था
मैं
तेरी
आँखों
की
हरक़त
से
कभी
पागल
हुआ
था
मैं
मुझे
गर
होश
आएगा
करूँँगा
बात
मैं
ख़ुद
से
इसी
ही
सोच
में
हूँगा
कभी
बेकल
हुआ
था
मैं
परेशाँ
भी
मेरा
होना
समझ
ले
बेमुनासिब
था
लगी
है
लत
शराबों
की
कभी
अफ़ज़ल
हुआ
था
मैं
- Afzal Sultanpuri
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मुझ
को
आदत
है
रूठ
जाने
की
आप
मुझ
को
मना
लिया
कीजे
Jaun Elia
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मैं
जिसे
प्यार
का
अंदाज़
समझ
बैठा
हूँ
वो
तबस्सुम
वो
तकल्लुम
तिरी
आदत
ही
न
हो
Sahir Ludhianvi
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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उसको
भुला
कर
मुझको
ये
मालूम
हुआ
आदत
कैसी
भी
हो
छोड़ी
जा
सकती
है
Nadeem Shaad
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आदत
सी
बना
ली
है
तुमने
तो
'मुनीर'
अपनी
जिस
शहर
में
भी
रहना
उकताए
हुए
रहना
Muneer Niyazi
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ये
काम
दोनों
तरफ़
हुआ
है
उसे
भी
आदत
पड़ी
है
मेरी
Shariq Kaifi
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मुझे
मायूस
भी
करती
नहीं
है
यही
आदत
तिरी
अच्छी
नहीं
है
Javed Akhtar
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आप
पहलू
में
जो
बैठें
तो
सँभल
कर
बैठें
दिल-ए-बेताब
को
आदत
है
मचल
जाने
की
Jaleel Manikpuri
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हमारी
ईद
तो
होनी
नहीं
है
नहीं
आए
अगर
इस
मरतबा
तुम
Afzal Sultanpuri
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बड़ी
हसरत
हमारी
थी
मगर
दिल
हार
कर
बैठे
बचाया
हद
से
ज़्यादा
पर
उसे
हम
प्यार
कर
बैठे
रहे
ख़ामोश
कुछ
दिन
तक
मगर
कहना
ज़रूरी
था
मिली
इक
रोज़
हमको
और
हम
इज़हार
कर
बैठे
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Afzal Sultanpuri
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कभी
ऐसी
हिमाक़त
हो
न
जाए
हमें
फिर
से
मोहब्बत
हो
न
जाए
रहूॅंगा
अब
इबादत
में
हमेशा
कोई
हम
सेे
कुदूरत
हो
न
जाए
चटाई
से
हटेंगे
किस
तरह
से
कि
जब
तक
ये
इमामत
हो
न
जाए
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Afzal Sultanpuri
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ज़रूरत
जब
पड़े
मेरी
उठा
देना
अभी
मैं
मौत
के
जैसे
नहीं
सोया
तुम्हारी
देखकर
तकलीफ़
मैंने
भी
बहुत
मन
था
मगर
चुप
था
नहीं
रोया
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Afzal Sultanpuri
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चाल
चलती
थी
वो
छुपाते
हुए
शर्म
आई
नहीं
बताते
हुए
मर
गया
एक
शख़्स
पीछे
ही
मुड़के
देखी
नहीं
वो
जाते
हुए
एक
लड़का
समझ
नहीं
पाया
मर
गया
वो
भी
ज़हर
खाते
हुए
आख़िरी
बार
मुझ
सेे
मिल
लेना
इश्क़
अपना
मगर
निभाते
हुए
ख़ूब
थी
उसकी
यार
अंगड़ाई
ख़ूब
लगती
थी
ज़ुल्म
ढाते
हुए
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Afzal Sultanpuri
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