gham aisa chahiye ki musalsal lage mujhe | ग़म ऐसा चाहिए कि मुसलसल लगे मुझे

  - Afzal Sultanpuri
ग़मऐसाचाहिएकिमुसलसललगेमुझे
रक्खूँजहाँभीपैरमैंदलदललगेमुझे
तूइश्क़करकेयारमिराहोशतोउड़ा
ऐसाउड़ानायारकिअव्वललगेमुझे
कुछपेड़औरचारपरिंदेख़रीदलूँ
फिरयूँँकरूँँशुमारकिजंगललगेमुझे
कलशामजिसकीयादमेंबेहोशहोगया
भर्तीकियागयामुझेबोतललगेमुझे
कमरेकीफ़र्शऔरबहाएागयालहू
जबभीनज़रपड़ेमिरीमक़्तललगेमुझे
किसपीरकीनज़रकाकरमहोगयाबता
जोइश्क़मेंपड़ेथेवोपागललगेमुझे
चलइसतरहसेबोललगेबातसबसही
तूझूठऐसाबोलकिअफ़ज़ललगेमुझे
  - Afzal Sultanpuri
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