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Adesh Rathore
meri aankhoñ men bas teri tasveer ho
meri aankhoñ men bas teri tasveer ho | मेरी आँखों में बस तेरी तस्वीर हो
- Adesh Rathore
मेरी
आँखों
में
बस
तेरी
तस्वीर
हो
फिर
ख़ुदा
चाहे
जैसी
भी
तक़दीर
हो
तुम
हँसी
हो
ख़ुशी
हो
अलम
हो
मेरा
तुम
जो
कह
दो
तो
ख़्वाबों
की
ता'बीर
हो
- Adesh Rathore
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फ़क़त
घर
की
ही
याद
आती
है
जब
तब
वगरना
कोई
मुश्किल
है
नहीं
अब
मुझे
परदेस
ने
अपना
लिया
है
पिताजी
आप
चिंता
मत
करो
अब
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Adesh Rathore
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जाता
नहीं
है
जिस्म
से
कैसा
बुखार
है
लगता
है
ये
जनाब
का
पहला
बुख़ार
है
आया
ख़राब
वक़्त
तो
कहने
लगे
हैं
लोग
ख़ुद
देखिए
ये
आपका
अपना
बुख़ार
है
पैसा
ही
इक
अज़ीज़
है
जिनको
वो
कहते
हैं
पैसा
नहीं
है
ज़िंदगी
पैसा
बुख़ार
है
कहने
लगा
तबीब
मेरा
हाल
देखकर
इक
शख़्स
की
कमी
है
सो
हल्का
बुख़ार
है
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ज़िंदगी
है
कि
तुम
ही
हो
शायद
आशिक़ी
है
कि
तुम
ही
हो
शायद
सारी
दुनिया
तो
एक
ग़लती
है
जो
सही
है
वो
तुम
ही
हो
शायद
एक
लड़की
जो
इश्क़
में
कब
से
रो
रही
है
वो
तुम
ही
हो
शायद
कोई
था
जो
उसे
समझता
था
कह
रही
है
वो
तुम
ही
हो
शायद
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अब
ज़रूरत
नहीं
बिछौने
की
हमको
आदत
है
नीचे
सोने
की
क्या
सितम
है
कि
दिल
के
पिंजरे
में
एक
चिड़िया
है
वो
भी
सोने
की
अब
कोई
डर
नहीं
अँधेरों
का
अब
कोई
शय
नहीं
है
खोने
की
यूँँॅं
ही
रोते
हो
बेसबब
या
फिर
है
कोई
ख़ास
वज्ह
रोने
की
इश्क़
भी
महॅंगी
चीज़
है
'आदेश'
हम
ग़रीबों
से
अब
न
होने
की
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मेरे
हमदम
दिसंबर
की
नमी
रातों
में
भी
अक्सर
तुम्हारी
याद
आती
है
पसीने
छूट
जाते
हैं
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