bas yahii harf-e-hikaayaat rahe aaKHir tak | बस यही हर्फ़-ए-हिकायात रहे आख़िर तक

  - Adesh Rathore
बसयहीहर्फ़-ए-हिकायातरहेआख़िरतक
हमकोईअहल-ए-ख़राबातरहेआख़िरतक
कैसेआबादकरेंगेवोकिसीकीदुनिया
ख़ुदजोबर्बादियोंकेपाथरहेआख़िरतक
ग़मकिसीकोभीतोतन्हानहींरहनेदेता
सोयहाँकौनमेरेसाथरहेआख़िरतक
आख़िरशजाकेभीहमपासकेउनकेजवाब
ज़िंदगीसेजोसवालातरहेआख़िरतक
अबनहींचाहकिरौशनहोहमारीदुनिया
अबतोख़्वाहिशहैकियेरातरहेआख़िरतक
  - Adesh Rathore
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