vaqt | "वक़्त"

  - Prashant Kumar
"वक़्त"
येवक़्तहीहैजिसने
किसूकोदुखमेंहँसादिया
किसूकोख़ुशीमेंरुलादिया
किसूकोदिनमेंसुलादिया
किसूकोशबमेंउठादिया
येवक़्तहीहैजो
कभूघरकोउजाड़दे
कभूघरकोसँवारदे
कभूदेसब्ज़जा-ब-जा
कभूबहारछीनले
येकौनहैयेकौनहै
येवक़्तहैयेवक़्तहै
उसूलकासख़्तहै
जबइसनेपासेपलटदिए
फ़क़ीरसेठहोगए
चूहेशे'रहोगए
इसीसेलाठियाँचलीं
इसीसेहस्तियाँमिटीं
इसीसेबाज़ियाँकटीं
इसीसेबस्तियाँजलीं
इसीसेगोलियाँचलीं
वक़्तकीजंगमें
किसूनेहाथखोदिया
किसूनेकुछगँवादिया
यहवक़्तहीहैजिसने
एकसेएकधुरंधरको
माटीमेंमिलादिया
बुलंदजिसकेहौसले
क़दरजोवक़्तकीजानता
वक़्तउसीकाहसीनहै
जिसकावक़्तहसीनहै
समझोवोनवाबहै
जोइससेेअनजानहै
उसकावक़्तख़राबहै
  - Prashant Kumar
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