mirii zindagi tire haath men ise khaar kar tu ya phool kar | मिरी ज़िंदगी तिरे हाथ में इसे ख़ार कर तू या फूल कर

  - Prashant Kumar
मिरीज़िंदगीतिरेहाथमेंइसेख़ारकरतूयाफूलकर
मिरातज़्किरासहीमगरमिरीज़िल्लतेंतोक़ुबूलकर
मिरीझूट-मूटकीदास्ताँजोबनाबनाकेसुनारहा
अरेआपकाहीहबीबहैमुझेथामलोउसेभूलकर
कोईगुफ़्तगूचलउधररहीथीमुझेख़यालयेगया
कितन-ए-नज़ारकोचूमलूँतिरीबाहोंमेंअभीझूलकर
कोईक़िस्तज़ख़्मकीभररहाहैसूदसाँसकादेरहा
मिरीज़िंदगीकाहिसाबकितनारहाहैकिसपेवसूलकर
अरेक्याहुआजोग़ुबारहूँयानज़ीरहूँयाहफ़ीज़हूँ
मैंहरएकरूपमेंहूँतिरामुझेहरअदामेंक़ुबूलकर
कितिरेवजूदसेचलरहीहैंमिरीहयातकीडोरियाँ
मुझेछोड़नानहींबीचराह-ए-फ़नामेंऐसेफ़ुज़ूलकर
  - Prashant Kumar
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