maaloom hai rehta hooñ gulaabon kii gali men | मालूम है रहता हूँ गुलाबों की गली में

  - Prashant Kumar
मालूमहैरहताहूँगुलाबोंकीगलीमें
तुमफिरभीमुझेढूँढ़रहेमूँगफलीमें
सदियोंसेजिसेख़्वाबमेंहीदेखरहेथे
महबूबवोरहताहैअबअपनीहीगलीमें
मुझकोतिरेअंदरवोसभीगुननज़रआए
जोरामभरोसेमेंमिलेराम-कलीमें
मैंबाँटकेखाताहूँकोईचीज़होचाहे
वोदिलमेंसमानेलगेइकगुड़कीडलीमें
सोजाएँसभीचारबजेकरकेइशारा
चुपकेसेबुलालेनासजनदिलकीगलीमें
लगताहैइन्हेंऔरकोईकामनहींहै
बसझाँकतेरहतेहैंसभीमेरीगलीमें
  - Prashant Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy