log har samt se kal aag lagaane aa.e | लोग हर सम्त से कल आग लगाने आए

  - Prashant Kumar
लोगहरसम्तसेकलआगलगानेआए
येपरिंदेहीमिरीजानबचानेआए
दोस्तोंनेतोशुरूसेहीदुखायाथादिल
मिरेदुश्मनहीमगरदिलकोलुभानेआए
लोगज़िंदाहैंसभीमेरेनिवालेपरही
फिरभीऔक़ातमिरीमुझकोदिखानेआए
दोस्तीअबकिबहुतसोचसमझकरकरियो
दोस्तहीरातमुझेज़हरखिलानेआए
मैंनेपालाहैजिसेख़ून-पसीनेसे'प्रशांत'
मेरेऊपरकिवहीहाथउठानेआए
मुस्कुरानेकोकहापहलेसभीनेमुझसेे
फिरयहीलोगमुझेआँखदिखानेआए
क्यूँँचलेआएथेकलबज़्म-ए-सुख़नसे'प्रशांत'
क्यूँँकिसबशे'रहमारेहीसुनानेआए
  - Prashant Kumar
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