koi kyuuñ yaad meri kahaanii rakhe | कोई क्यूँ याद मेरी कहानी रखे

  - Prashant Kumar
कोईक्यूँयादमेरीकहानीरखे
बे-वजहअपनीआँखोंमेंपानीरखे
रब्तहैजबउसेहरनईचीज़से
साँसक्यूँफिरबदनमेंपुरानीरखे
क्यूँहोहादिसाकोईइसउम्रमें
कबतलकअपनेवशमेंजवानीरखे
वोजिसेइश्क़हैहीनहींमुझसेेतो
बे-वजहपासमेरीनिशानीरखे
रिंदकोसाक़ियाकायेपैग़ामहै
दुश्मनीजामसेख़ानदानीरखे
तनबदनढंगसेभीगजाएख़ुदा
अबकीआँखोंमेंबारिशकापानीरखे
  - Prashant Kumar
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