ishq ka jab shuroo se fasana hua vo mujhe dekh kar muskuraane lage | इश्क़ का जब शुरू से फ़साना हुआ वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगे

  - Prashant Kumar
इश्क़काजबशुरूसेफ़सानाहुआवोमुझेदेखकरमुस्कुरानेलगे
हाथमेंहाथथामाउठेफिरवहींसातफेरोंकीरस्मेंनिभानेलगे
कलख़फ़ाहोगयाथाकिसीबातपरखोलकरबालआएमिरेपासमें
फिरदेखाउन्होंनेकहाँकौनहैहोंटपरहोंटधरकेमनानेलगे
चोटमुझकोलगीदर्दउनकोहुआमंदिरोंमेंगएमस्जिदोंमेंगए
मेरेज़ख़्मोंकीकीहैदु'आइसक़दरछोड़करसबख़ुदाकामआनेलगे
इश्क़मेंक्याख़ताहैबतादीजिएफिरहमारीख़ताकीसज़ादीजिए
फेरलींक्यूँँनिगाहेंहमेंदेखकरकबसेइतनीअदातुमदिखानेलगे
कुछसमझमेंनहींरहाक्याकरूँँयारहरज़ख़्मपरहैंतुम्हारेनिशाँ
हाथहैंफूलजैसेमगरयेबताओकिलोहेकाख़ंजरउठानेलगे
  - Prashant Kumar
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