guzare hue phir laut zamaane nahin aate | गुज़रे हुए फिर लौट ज़माने नहीं आते

  - Prashant Kumar
गुज़रेहुएफिरलौटज़मानेनहींआते
अबराहमेंवोलोगपुरानेनहींआते
हररोज़अकेलेहीनिकलतेहैंसफ़रपर
इकदौरहुआलोगबुलानेनहींआते
इतनाहैअगररब्तउन्हेंरंज-ओ-अलमसे
फिरक्यूँँमिरीदुल्हनकोसजानेनहींआते
सबफूँकलगाकरहीक़दमरखनाडगरमें
जोलोगरखेंकाँटाउठानेनहींआते
हमसूखगएसूखगएपुतलियाँसूखीं
अबहमकोहमारेहीरुलानेनहींआते
इकरोज़चबाएथेचनेउनकोतभीतो
अबजालीइधरनोटचलानेनहींआते
  - Prashant Kumar
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