gar kisi ko nahin bhi bhaaye ham | गर किसी को नहीं भी भाए हम

  - Prashant Kumar
गरकिसीकोनहींभीभाएहम
फिरअकेलेजिएमरेंगेहम
उम्र-भरइश्क़हीकरेंगेहम
तेरीबाहोंमेंहीमरेंगेहम
सोचलोतोड़नेसेपहलेदिल
अबदुबारानहींमिलेंगेहम
तूबहुतहीख़राबआदमीहै
दिलमेंतेरेनहींरहेंगेहम
तुमबहुतझूटबोलतेहोअब
बाततुमसेेनहींकरेंगेहम
भूखलगनेलगीतुझेभीचल
अबकिलोभावसेबिकेंगेहम
बालोंमेंतूलगाहमेंलगा
फूलकीहीतरहखिलेंगेहम
कोईकुछकहरहातोकहनेदे
तेरेहैंतेरेहीरहेंगेहम
  - Prashant Kumar
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