aise na pa sakoge ki mushkil zaroor hooñ | ऐसे न पा सकोगे कि मुश्किल ज़रूर हूँ

  - Prashant Kumar
ऐसेपासकोगेकिमुश्किलज़रूरहूँ
वैसेमैंहरख़ुलूसकेक़ाबिलज़रूरहूँ
आबादकरकेरहाहूँख़ाकबस्तियाँ
मानातिरीनिगाहमेंक़ातिलज़रूरहूँ
इल्म-ओ-हुनरजिसेभीदियाइश्क़कादिया
मैंबे-वफ़ाकीलिस्टमेंशामिलज़रूरहूँ
देखानहींकिसीकोभीक़ौमीनिगाहसे
हाँहम-नसब'अयालमेंदाख़िलज़रूरहूँ
हलआजतकभीएकमु'अम्मानहींहुआ
वैसेतिरीनिगाहमेंक़ाबिलज़रूरहूँ
करनेलगींहैंयादमुझेभावीपीढ़ियाँ
अहल-ए-ज़मींकीभीड़मेंख़ामिलज़रूरहूँ
बोलानहींहूँआजतलकसचजहानमें
वैसेहरइकनिगाहमेंबातिलज़रूरहूँ
तूख़ुदमुझेदेखेतोयेबातहैअलग
वैसेतोतेरीआँखकेकाबिलज़रूरहूँ
जबभीकियाजहानकामैंनेभलाकिया
फिरभीकिहरबुराईमेंशामिलज़रूरहूँ
  - Prashant Kumar
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