agar nafrat mitaana chahta kab ka mita deta | अगर नफ़रत मिटाना चाहता कब का मिटा देता

  - Prashant Kumar
अगरनफ़रतमिटानाचाहताकबकामिटादेता
मगरफिरयेज़मानामुझकोजीनेकीदु'आदेता
अगरजन्नतमिलीहोतीकिसीकोदिलदुखानेसे
तोफिरअहल-ए-ज़मींकोवोअरेकबकाजलादेता
पताहोताअगरअबकेदिवानेना-समझहैंतो
पकड़करहाथदोनोंकोगलेसेहीलगादेता
कहींमंज़िलकहींरस्ताकहींतेरामुसाफ़िरहै
सफ़रकेक़ा'इदेक्याहैंउसेकुछतोबतादेता
तिरीख़िदमतमेंजान-ए-मनसदातय्याररहतेहैं
अगरदिलहीलगानाथातोतूहमकोबतादेता
  - Prashant Kumar
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