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Ada Jafarey
ghar ka rastaa bhi mila tha shaayad
ghar ka rastaa bhi mila tha shaayad | घर का रस्ता भी मिला था शायद
- Ada Jafarey
घर
का
रस्ता
भी
मिला
था
शायद
राह
में
संग-ए-वफ़ा
था
शायद
इस
क़दर
तेज़
हवा
के
झोंके
शाख़
पर
फूल
खिला
था
शायद
जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
लोग
बे-मेहर
न
होते
होंगे
वहम
सा
दिल
को
हुआ
था
शायद
तुझ
को
भूले
तो
दु'आ
तक
भूले
और
वही
वक़्त-ए-दुआ
था
शायद
ख़ून-ए-दिल
में
तो
डुबोया
था
क़लम
और
फिर
कुछ
न
लिखा
था
शायद
दिल
का
जो
रंग
है
ये
रंग
'अदा'
पहले
आँखों
में
रचा
था
शायद
- Ada Jafarey
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कान्हा
होंगे
लोग
वहाँ
के
राधा
होंगी
बालाएँ
प्यार
की
बंसी
बजती
होगी
हर
समय
हर
ठाओं
रे
Ghaus Siwani
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सब
की
हिम्मत
नहीं
ज़माने
में
लोग
डरते
हैं
मुस्कुराने
में
एक
लम्हा
भी
ख़र्च
होता
नहीं
मेरी
ख़ुशियों
को
आने
जाने
में
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Vishal Singh Tabish
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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फूल
कर
ले
निबाह
काँटों
से
आदमी
ही
न
आदमी
से
मिले
Khumar Barabankvi
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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ख़ुद
हिजाबों
सा
ख़ुद
जमाल
सा
था
दिल
का
आलम
भी
बे-मिसाल
सा
था
अक्स
मेरा
भी
आइनों
में
नहीं
वो
भी
कैफ़ियत-ए-ख़याल
सा
था
दश्त
में
सामने
था
ख़ेमा-ए-गुल
दूरियों
में
अजब
कमाल
सा
था
बे-सबब
तो
नहीं
था
आँखों
में
एक
मौसम
कि
ला-ज़वाल
सा
था
ख़ौफ़
अँधेरों
का
डर
उजालों
से
सानेहा
था
तो
हस्ब-ए-हाल
सा
था
क्या
क़यामत
है
हुज्ला-ए-जाँ
में
उस
के
होते
हुए
मलाल
सा
था
जिस
की
जानिब
'अदा'
नज़र
न
उठी
हाल
उस
का
भी
मेरे
हाल
सा
था
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Ada Jafarey
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होंटों
पे
कभी
उन
के
मिरा
नाम
ही
आए
आए
तो
सही
बर-सर-ए-इल्ज़ाम
ही
आए
Ada Jafarey
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दीप
था
या
तारा
क्या
जाने
दिल
में
क्यूँँ
डूबा
क्या
जाने
गुल
पर
क्या
कुछ
बीत
गई
है
अलबेला
झोंका
क्या
जाने
आस
की
मैली
चादर
ओढ़े
वो
भी
था
मुझ
सा
क्या
जाने
रीत
भी
अपनी
रुत
भी
अपनी
दिल
रस्म-ए-दुनिया
क्या
जाने
उँगली
थाम
के
चलने
वाला
नगरी
का
रस्ता
क्या
जाने
कितने
मोड़
अभी
बाक़ी
हैं
तुम
जानो
साया
क्या
जाने
कौन
खिलौना
टूट
गया
है
बालक
बे-परवा
क्या
जाने
ममता
ओट
दहकते
सूरज
आँखों
का
तारा
क्या
जाने
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Ada Jafarey
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बड़े
ताबाँ
बड़े
रौशन
सितारे
टूट
जाते
हैं
सहर
की
राह
तकना
ता
सहर
आसाँ
नहीं
होता
Ada Jafarey
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एक
आईना
रू-ब-रू
है
अभी
उस
की
ख़ुश्बू
से
गुफ़्तुगू
है
अभी
Ada Jafarey
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