agar tum rok do izhaar-e-laachaarii karunga | अगर तुम रोक दो इज़हार-ए-लाचारी करूँँगा

  - Abdurrahman Wasif
अगरतुमरोकदोइज़हार-ए-लाचारीकरूँँगा
जोकहनीहैमगरवोबातमैंसारीकरूँँगा
मेरादिलभरगयाबस्तीकीरौनक़सेसौअबमैं
किसीजलतेहुएसहराकीतय्यारीकरूँँगा
सर-ए-राहतमन्नाख़ाकडालूँगामैंसरमें
जोआँसूबुझगएउनकीअज़ा-दारीकरूँँगा
मुझेअबगएहैंनफ़रतोंकेबीजबोने
सोमेराहक़येबनताहैकिसरदारीकरूँँगा
मैंलेआऊँगामैदाँमेंसभीलफ़्ज़ोंकेलश्कर
औरउनसेलौह-ए-फ़िक्र-ओ-फ़नपेपुरकारीकरूँँगा
कईग़मगएहैंहालमेरापूछनेको
मैंअबइसहालमेंकिसकिसकीदिलदारीकरूँँगा
  - Abdurrahman Wasif
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