ye bataa yaum-e-mohabbat ka samaan hai ki nahin | ये बता यौम-ए-मोहब्बत का समाँ है कि नहीं

  - Abbas Tabish
येबतायौम-ए-मोहब्बतकासमाँहैकिनहीं
शहरकाशहरगुलाबोंकीदुकाँहैकिनहीं
आदतनउसकेलिएफूलख़रीदेवरना
नहींमालूमवोइसबारयहाँहैकिनहीं
येतेरेबादजोलेताहूँमैंलंबीसाँसें
मुझकोयेजाननाहैजिस्ममेंजाँहैकिनहीं
हमतोफूलोंकेएवज़फूललियाकरतेहैं
क्याख़बरइसकारिवाज़आपकेयहाँहैकिनहीं
उसगलीकातोपताठीकबतायातूने
येबताउसमेंवोदिलदारमकाँहैकिनहीं
पहलेतोमुझकोदिलातेहैवोग़ुस्सा'ताबिश'
औरफिरपूछतेहैमुँहमेंज़बाँहैकिनहीं
  - Abbas Tabish
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