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Ajeetendra Aazi Tamaam
ik mahaj qabrgaah taajmahal
ik mahaj qabrgaah taajmahal | इक महज़ क़ब्रगाह ताजमहल
- Ajeetendra Aazi Tamaam
इक
महज़
क़ब्रगाह
ताजमहल
देख
ली
शान-ए-आगरा
क्या
है
- Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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उलझ
करके
तेरी
ज़ुल्फ़ों
में
यूँँ
आबाद
हो
जाऊँ
कि
जैसे
लखनऊ
का
मैं
अमीनाबाद
हो
जाऊँ
मैं
यमुना
की
तरह
तन्हा
निहारूँ
ताज
को
कब
तक
कोई
गंगा
मिले
तो
मैं
इलाहाबाद
हो
जाऊँ
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Ashraf Jahangeer
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वो
चाहता
था
कि
कासा
ख़रीद
ले
मेरा
मैं
उस
के
ताज
की
क़ीमत
लगा
के
लौट
आया
Rahat Indori
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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दिल
ऐसा
कि
सीधे
किए
जूते
भी
बड़ों
के
ज़िद
इतनी
कि
ख़ुद
ताज
उठा
कर
नहीं
पहना
Munawwar Rana
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बनाओ
ताजमहल
के
ब-जाए
ताश
महल
तमाम
उम्र
मुहब्बत
करो
गिराओ
बनाओ
Charagh Sharma
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हुस्न
ऐसा
है
कि
देखो
तो
लगे
ताज-महल
इस
पे
वो
शख़्स
सँवरता
भी
ग़ज़ल
जैसा
है
Manazir Ashiq Harganvi
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दिल्ली
में
आज
भीक
भी
मिलती
नहीं
उन्हें
था
कल
तलक
दिमाग़
जिन्हें
ताज-ओ-तख़्त
का
Meer Taqi Meer
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एक
कमी
थी
ताज-महल
में
मैंने
तिरी
तस्वीर
लगा
दी
Kaif Bhopali
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किसको
दिल
में
सँभाल
के
रक्खूँ
कौन
तेरे
सिवा
बता
मेरा
Ajeetendra Aazi Tamaam
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फ़क़त
मालूम
था
तुझ
सेे
लगाकर
मिरा
दिल
टूट
जाएगा
किसी
दिन
नहीं
मालूम
था
पर
दर्द
देकर
तू
इतना
मुस्कुराएगा
किसी
दिन
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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उम्र
कम
पड़
जायेगी
हर
ख़्वाब
गर
पूरा
हुआ
और
गर
पूरा
न
हो
तो
काटती
है
ज़िंदगी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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सही
सही
बता
है
क्या
भला
है
क्या
बुरा
है
क्या
न
इश्क़
है
न
चारा-गर
तो
दर्द
की
दवा
है
क्या
लहू
सा
लाल
लाल
है
ये
आँखों
में
जमा
है
क्या
बुझे
बुझे
से
लोग
हैं
ये
ज़िंदगी
सज़ा
है
क्या
अजीब
कशमकश
सी
है
ये
दिल
तुझे
हुआ
है
क्या
सुकून
हो
न
चैन
हो
तो
जीने
में
मज़ा
है
क्या
जो
ख़ाक
हो
रहे
हैं
हम
किसी
की
बद्दुआ
है
क्या
जला
दिया
तो
जल
गया
ये
जिस्म
बे-वफ़ा
है
क्या
बहक
रहे
हैं
देख
कर
बदन
तेरा
नशा
है
क्या
हर
एक
शय
मलंग
है
बहार
में
अदा
है
क्या
उसी
की
आरज़ू
है
क्यूँ
तमाम
वो
ख़ुदा
है
क्या
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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बस
देखते
ही
रह
गए
जब
सामना
हुआ
शिकवा
हुआ
न
उन
सेे
कोई
भी
गिला
हुआ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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