hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Ajeetendra Aazi Tamaam
badi shiddat se duniya raahon men kaante bichaati hai
badi shiddat se duniya raahon men kaante bichaati hai | बड़ी शिद्दत से दुनिया राहों में कांटे बिछाती है
- Ajeetendra Aazi Tamaam
बड़ी
शिद्दत
से
दुनिया
राहों
में
कांटे
बिछाती
है
बड़े
आराम
से
हम
चुभती
नोकें
तोड़
लेते
हैं
- Ajeetendra Aazi Tamaam
Download Sher Image
फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
Read Full
Tariq Shaheen
Send
Download Image
32 Likes
ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
Send
Download Image
45 Likes
बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
55 Likes
मज़ा
चखा
के
ही
माना
हूँ
मैं
भी
दुनिया
को
समझ
रही
थी
कि
ऐसे
ही
छोड़
दूँगा
उसे
Rahat Indori
Send
Download Image
41 Likes
लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
Read Full
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
52 Likes
जहाँ
तक
आके
तुम
वापस
गए
हो
वहाँ
अब
तक
कोई
पहुँचा
नहीं
है
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
47 Likes
हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
Send
Download Image
33 Likes
चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
Send
Download Image
32 Likes
जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
Send
Download Image
4 Likes
बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
Send
Download Image
31 Likes
Read More
वफ़ा
करना
हमें
खलता
रहा
है
मुहब्बत
में
ये
दिल
जलता
रहा
है
ग़मों
की
आँधियाँ
सहते
रहे
हैं
ज़फ़ा
का
सिलसिला
चलता
रहा
है
ख़ता
करना
हमें
मंज़ूर
कब
था
ख़ता-वारों
को
ये
खलता
रहा
है
निकल
आए
हर
इक
जंजाल
से
हम
ज़माना
हाथ
को
मलता
रहा
है
हुई
जिस
पर
बुज़ुर्गों
की
इनायत
हक़ीक़ी
राह
पर
चलता
रहा
है
घटा
कर
साँसें
देता
है
नया
दिन
समय
हर
शख़्स
को
छलता
रहा
है
तराशो
ज़ेहन
को
दिन
रात
अपने
बदन
का
हुस्न
तो
ढलता
रहा
है
उसे
पाने
की
कोशिश
में
लगे
हैं
जिगर
में
ख़्वाब
जो
पलता
रहा
है
Read Full
Ajeetendra Aazi Tamaam
Download Image
2 Likes
धर्म
से
जोड़ा
गया
है
जाति
में
तोला
गया
है
आदमी
को
जान-ए-मन
कब
आदमी
समझा
गया
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
4 Likes
कैसे
बताएँ
कितने
मिटे
राह-ए-इश्क़
में
अपनी
क़सम
के
बाद
भी
लाखों
सितम
हुए
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
1 Like
कंजूसी
को
ताक़
पे
रखना
होता
है
गुड़
कहने
से
कब
मुँह
मीठा
होता
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
3 Likes
एहसास
नहीं
होता
लुटने
का
सनम
हम
को
जब
आपकी
महफ़िल
से
हम
लौट
के
आते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Shikwa Shayari
Baaten Shayari
Kanta Shayari
Birthday Shayari
Qabr Shayari