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Adv Aaves Shaikh
Zamane me nikharna chahta hu
ज़माने में निखरना चाहता हूँ
- Adv Aaves Shaikh
ज़माने
में
निखरना
चाहता
हूँ
कुछ
ऐसा
काम
करना
चाहता
हूँ
ये
जो
बेरंग-सी
दुनिया
है
अपनी
मैं
इस
में
रंग
भरना
चाहता
हूँ
तुम्हारी
तरह
हर
वादे
से
अपने
कभी
मैं
भी
मुकरना
चाहता
हूँ
मुझे
मजबूरियाँ
रोके
हैं
वरना
किसी
से
प्यार
करना
चाहता
हूँ
जिया
तन्हा
हूँ
सारी
उम्र
लेकिन
तुम्हारे
साथ
मरना
चाहता
हूँ
और
इस
में
रह
के
क्या
पाया
है
आवेस
सो
अब
हद
से
गुज़रना
चाहता
हूँ
- Adv Aaves Shaikh
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उड़ा
आया
था
उसको
पर
मेरे
बाद
उसे
आज़ादी
पिंजरा
हो
गई
थी
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तुम
जीते
और
मैं
हारा
मैं
हारा
और
तुम
जीते
तुमने
यह
सब
झूठ
सुना
हो
ऐसा
भी
हो
सकता
है
Adv Aaves Shaikh
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मैं
उसको
मुख़्तलिफ़
समझा
था
'आवेस'
मगर
फिर
वो
भी
दुनिया
हो
गई
थी
Adv Aaves Shaikh
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मैं
तुम
सेे
दो
घड़ी
क्या
मिलने
आया
मेरी
तन्हाई
तन्हा
हो
गई
थी
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सारी
दुनिया
में
कोहराम
था
उसके
लब
पे
मेरा
नाम
था
वो
मिले
भी
बिछड़
भी
गए
ये
सज़ा
थी
या
इनआम
था
ख़ूब-रू
थी
कहानी
मगर
जो
कहानी
का
अंजाम
था
थोड़ा
अच्छा
था
थोड़ा
बुरा
जो
भी
था
मैं
सर-ए-आम
था
तू
ने
भी
मशवरे
ही
दिए
साथ
देना
तेरा
काम
था
हर
तरफ़
ख़्वाबों
की
लाशें
थीं
मेरी
आँखों
में
आसाम
था
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