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Aatish Indori
aisa hogaa ki zamaana ye pighal jaayega
aisa hogaa ki zamaana ye pighal jaayega | ऐसा होगा कि ज़माना ये पिघल जाएगा
- Aatish Indori
ऐसा
होगा
कि
ज़माना
ये
पिघल
जाएगा
ख़्वाब
देखोगे
यूँँ
तो
वक़्त
निकल
जाएगा
हम
जो
दो-चार,
अगर
यार
बदल
जाएँगे
सूरत-ए-हाल
ज़माने
का
बदल
जाएगा
- Aatish Indori
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आ
कि
तुझ
बिन
इस
तरह
ऐ
दोस्त
घबराता
हूँ
मैं
जैसे
हर
शय
में
किसी
शय
की
कमी
पाता
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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अव्वल
तो
तेरी
दोस्ती
पर
शक
नहीं
कोई
और
दूसरा
ये
मुझको
तेरे
राज़
पता
हैं
Tanoj Dadhich
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टूटते
रिश्तों
से
बढ़कर
रंज
था
इस
बात
का
दरमियाँ
कुछ
दोस्त
थे,
और
दोस्त
भी
ऐसे,
के
बस
Renu Nayyar
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मेरा
हर
दिन
तेरी
फ़ुर्क़त
में
बसर
होता
है
यार
होना
तो
नहीं
चाहिए,
पर
होता
है
Harman Dinesh
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यूँँ
लगे
दोस्त
तिरा
मुझ
से
ख़फ़ा
हो
जाना
जिस
तरह
फूल
से
ख़ुशबू
का
जुदा
हो
जाना
Qateel Shifai
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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दोस्ती
लफ्ज़
ही
में
दो
है
दो
सिर्फ़
तेरी
नहीं
चलेगी
दोस्त
Zubair Ali Tabish
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इश्क़
में
पागल
हो
जाना
भी
फ़न
है
दोस्त
और
ये
दुख
की
बात
है
हम
फ़नकार
नहीं
Praveen Sharma SHAJAR
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जब
से
हम
ज़िंदगी
को
समझने
लगे
तब
से
हम
ख़ुद-कुशी
को
समझने
लगे
बेवफ़ाई
सनम
आपने
जब
से
की
तब
से
हम
बंदगी
को
समझने
लगे
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Aatish Indori
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माना
कि
धागे
पक्के
हैं
कच्चे
नहीं
कॉलेज
के
रिश्ते
मगर
टिकते
नहीं
ख़ूब-अच्छे
से
यह
बात
सुन
ले
हर
कोई
हम
मुफ़्त
मिल
सकते
हैं
पर
सस्ते
नहीं
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Aatish Indori
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बिना
नज़रों
में
आए
की
निगहबानी
हमारी
बहुत
भाई
हमें
जानाँ
अदाकारी
तुम्हारी
Aatish Indori
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अपना
हिस्सा
कहती
हो
क़िस्सा
आधा
कहती
हो
सच
में
तुम
भी
जान-ए-जाँ
मुझको
अपना
कहती
हो
भटकेगा
कैसे
कोई
रस्ता
पूरा
कहती
हो
वापस
लौटा
हूँ
जब
से
खोया
पाया
कहती
हो
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Aatish Indori
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ख़ुद
चलो
रास्ता
नहीं
चलता
इश्क़
में
पैंतरा
नहीं
चलता
जिसको
जाना
है
वो
तो
जाएगा
इश्क़
का
वास्ता
नहीं
चलता
देखिए
इश्क़
एक
जंगल
है
रास्तों
का
पता
नहीं
चलता
एक
लम्बा
समय
गुज़रने
दो
चार
दिन
में
पता
नहीं
चलता
गाँव
को
अब
महानगर
समझो
हादसों
का
पता
नहीं
चलता
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Aatish Indori
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