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Aatish Indori
baawfa bhi hooñ bewafa bhi hooñ
baawfa bhi hooñ bewafa bhi hooñ | बावफ़ा भी हूँ बे-वफ़ा भी हूँ
- Aatish Indori
बावफ़ा
भी
हूँ
बे-वफ़ा
भी
हूँ
माने
अच्छा
भी
हूँ
बुरा
भी
हूँ
इस
मरासिम
को
नाम
कुछ
दे
दो
जुड़ा
भी
हूँ
अलाहदा
भी
हूँ
दोस्त
की
बन
रही
है
मनकूहा
इस
से
ख़ुश
भी
हूँ
और
ख़फ़ा
भी
हूँ
मेरे
बेटों
को
कौन
समझाए
मैं
दु'आ
भी
हूँ
और
दवा
भी
हूँ
वक़्त
पड़ने
पे
लाज
रक्खूँगा
मैं
जुड़ा
भी
हूँ
और
जुदा
भी
हूँ
- Aatish Indori
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काम
आ
सकीं
न
अपनी
वफ़ाएँ
तो
क्या
करें
उस
बे-वफ़ा
को
भूल
न
जाएँ
तो
क्या
करें
Akhtar Shirani
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फिर
उसी
बे-वफ़ा
पे
मरते
हैं
फिर
वही
ज़िंदगी
हमारी
है
Mirza Ghalib
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किसी
बे-वफ़ा
से
बिछड़
के
तू
मुझे
मिल
गया
भी
तो
क्या
हुआ
मेरे
हक़
में
वो
भी
बुरा
हुआ
मेरे
हक़
में
ये
भी
बुरा
हुआ
Mumtaz Naseem
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ख़ुदा
का
शुक्र
अदा
कर
वो
बे-वफ़ा
निकला
ख़ुशी
मना
कि
तिरी
जान
की
बहाली
हुई
Shakeel Jamali
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मुझ
को
न
दिल
पसंद
न
वो
बे-वफ़ा
पसंद
दोनों
हैं
ख़ुद-ग़रज़
मुझे
दोनों
हैं
ना-पसंद
Bekhud Dehelvi
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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उसे
समझने
का
कोई
तो
रास्ता
निकले
मैं
चाहता
भी
यही
था
वो
बे-वफ़ा
निकले
Waseem Barelvi
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वफ़ा
जिस
से
की
बे-वफ़ा
हो
गया
जिसे
बुत
बनाया
ख़ुदा
हो
गया
Hafeez Jalandhari
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इंसान
अपने
आप
में
मजबूर
है
बहुत
कोई
नहीं
है
बे-वफ़ा
अफ़्सोस
मत
करो
Bashir Badr
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चल
गया
होगा
पता
ये
आपको
बे-वफ़ा
कहते
हैं
लड़के
आपको
इक
ज़रा
से
हुस्न
पर
इतनी
अकड़
तू
समझती
क्या
है
अपने
आपको
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Kushal Dauneria
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मोहब्बत
ने
मुझे
औक़ात
दिखला
दी
ज़रूरी
क्यूँँ
है
धन
ये
बात
सिखला
दी
Aatish Indori
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ख़यालों
के
घने
जंजाल
में
ख़ुद
फँस
गया
हूँ
बचाओ
दोस्तों
दलदल
में
गहरे
धँस
गया
हूँ
Aatish Indori
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अलग
हूँ
सब
से
पर
कम-तर
नहीं
हूँ
दिलों
में
हूँ
कोई
बे-घर
नहीं
हूँ
मेरी
तौहीन
तुम
कैसे
करोगे
मैं
कब
से
जिस्म
के
अंदर
नहीं
हूँ
हमारा
साथ
इक
संयोग
हैं
बस
सफ़र
में
हूँ
मैं
भी
रहबर
नहीं
हूँ
रहूँगा
सामने
आँखों
के
हर-दम
गुज़र
जाए
जो
वो
मंज़र
नहीं
हूँ
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Aatish Indori
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भला
कब
मैं
निशाने
पर
नहीं
आया
मेरे
हाथों
में
पर
पत्थर
नहीं
आया
मैं
तौबा
दोस्ती
से
कर
तो
लूँ
लेकिन
हमेशा
पीठ
पे
ख़ंजर
नहीं
आया
कहीं
ठहरे
नहीं
फिर
भी
शिकायत
है
सफ़र
में
ख़ुशनुमा
मंज़र
नहीं
आया
निभाई
है
मुहब्बत
उम्र
भर
आतिश
मुहब्बत
में
कभी
अंतर
नहीं
आया
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Aatish Indori
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अंत
जाना
है
कहानी
का
अक़ब
भी
जानो
बे-वफ़ा
क्यूँँ
हुआ
है
इसका
सबब
भी
जानो
आज
की
तरह
ही
हर
बार
रहोगे
असफल
इश्क़
करते
हो
तो
जतलाने
का
ढब
भी
जानो
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Aatish Indori
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