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Aatish Indori
musalsal kahaan gham muyassar huye
musalsal kahaan gham muyassar huye | मुसलसल कहाँ ग़म मुयस्सर हुये
- Aatish Indori
मुसलसल
कहाँ
ग़म
मुयस्सर
हुये
मुझे
तुम
बहुत
कम
मुयस्सर
हुये
मुहब्बत
में
तुमने
कमी
की
नहीं
मुझे
ज़ख़्म
हरदम
मुयस्सर
हुये
हूँ
हीरा
मगर
क़द्र
कुछ
भी
नहीं
यूँँ
ही
जो
उसे
हम
मुयस्सर
हुये
मुहब्बत
की
बारिश
छमा-छम
हुई
मुझे
ग़म
झमाझम
मुयस्सर
हुये
- Aatish Indori
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जब
भी
आता
है
दिसम्बर
ग़म
के
टाँके
खुलते
हैं
याद
है
यूँँ
तेरा
जाना
और
कहना
ख़ुश
रहो
Neeraj Neer
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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तेरा
बुत
तो
नहीं
था
पास
मेरे,
तेरी
यादों
को
अपने
पास
रखा
गोया
हस्ते
हुए
भी
हमने
सदा,
अपने
दिल
को
बहुत
उदास
रखा
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Prince
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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मैं
वो
नाकाम
मुसव्विर
हूँ
जो
ख़ुद
के
हाथों
एक
उदासी
के
सिवा
कुछ
न
बना
पाया
है
Ashutosh Vdyarthi
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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दूजों
का
दुख
समझने
को
बे
हद
ज़रूरी
है
थोड़ी
सही
प
दिल
में
अज़ीयत
बनी
रहे
Afzal Ali Afzal
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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माँ
के
रहने
से
ही
पत्थर
पे
असर
होता
है
झोपड़ी
हो
या
क़िला
तब
कहीं
घर
होता
है
तरबतर
कोई
दु'आओं
से
अगर
होता
है
हर
किसी
के
लिए
वो
शख़्स
शजर
होता
है
तब्सिरा
फूल
नहीं
करता
कभी
ख़ुश्बू
का
इश्क़
ऐलान
नहीं
करता
अगर
होता
है
गुल
खिला
होता
तो
फिर
वाह
निकलना
तय
थी
वाह
तो
मिलती
ही
है
शे'र
अगर
होता
है
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Aatish Indori
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ज़रूरत
है
तभी
तक
हमनवाई
है
मुहब्बत
का
मुक़द्दर
बेवफ़ाई
है
करो
वा'दा
कि
अंतिम
बेवफ़ाई
है
तुम्हें
जानाँ
मुहब्बत
की
दुहाई
है
किसी
ओर
का
वगरना
वो
नहीं
होता
इसी
कारण
की
मैंने
बेवफ़ाई
है
करो
वो
काम
जिस
सेे
डरते
हो
आतिश
अकेली
इक
यही
डर
की
दवाई
है
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Aatish Indori
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मैं
उसूलों
में
कोई
ढील
नहीं
कर
सकता
दोस्ती
इश्क़
में
तब्दील
नहीं
कर
सकता
इसलिए
इश्क़
तेरा
फ़ील
नहीं
कर
सकता
क्यूँँकि
आँखों
को
तेरी
झील
नहीं
कर
सकता
बे-वफ़ाओं
को
वफ़ा
मिल
नहीं
सकती
जानाँ
क़ुदरती
बात
है
तब्दील
नहीं
कर
सकता
एक
मुद्दत
भी
गुज़र
जाए
तो
भरते
नहीं
हैं
रूह
के
ज़ख़्म
कोई
हील
नहीं
कर
सकता
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Aatish Indori
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यूँँ
तो
कोठियाँ
हैं
यहाँ
बहुत
मुझे
फिर
भी
लोग
मिले
नहीं
मैं
समझ
गया
भले
देर
से
बड़े
शहर
दिल
के
बड़े
नहीं
वो
हमारे
गाँव
में
आते
थे
बड़े
शहर
वाले
वो
लोग
थे
कभी
फ़ोन
उन
का
लगा
नहीं
कभी
वो
पते
पे
मिले
नहीं
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Aatish Indori
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तुमको
लगता
यह
है
कि
अदना
सा
इक
वा'दा
टूटेगा
सच
तो
लेकिन
यह
है
भरोसे
पर
से
भरोसा
टूटेगा
Aatish Indori
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