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Aatish Indori
ik khula aasmaan dena hai
ik khula aasmaan dena hai | इक खुला आसमान देना है
- Aatish Indori
इक
खुला
आसमान
देना
है
हर
किसी
को
उड़ान
देना
है
एक
के
बाद
दूसरा
पर्चा
उम्र
भर
इम्तिहान
देना
है
दिल
में
इतनी
जगह
तो
दो
जानाँ
तुम
को
अपना
जहान
देना
है
चाहे
तुम
हो
या
बे-ज़बां
कोई
हर
किसी
को
अमान
देना
है
- Aatish Indori
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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एक
मुद्दत
वो
निगाहों
में
रहा
बाद
में
वो
मेरी
आहों
में
रहा
बेवफ़ाई
करना
आदत
हो
गई
ज़िंदगी
भर
वो
गुनाहों
में
रहा
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Aatish Indori
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बचना
अच्छा
है
जिनसे
मैं
उन
रस्तों
से
गुज़रा
हूँ
इक
दो
क्या
मैं
तो
यार
ढेरों
अवसादों
से
गुज़रा
हूँ
याद
नहीं
आता
तुमको
किस
डर
के
कारण
छोड़ा
था
जान-ए-जाँ
मैं
तो
जीवन
भर
आसेबों
से
गुज़रा
हूँ
सच
कहता
हूँ
मैंने
अपनी
चाहत
को
झूटा
पाया
जब
भी
जानाँ
दीवानों
के
अफ़्सानों
से
गुज़रा
हूँ
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Aatish Indori
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ध्यान
इतना
ज़रूर
रखते
हैं
बद-ख़यालात
दूर
रखते
हैं
नूर
हम
तो
ज़रूर
रखते
हैं
आप
पर
कोह-ए-नूर
रखते
हैं
हम
बना
लेंगे
बढ़िया
सा
माहौल
हम
भी
भाई
सुरूर
रखते
हैं
दोस्त
हम
लोग
हैं
ग़ज़ल
वाले
बोलने
का
शु'ऊर
रखते
हैं
भले
बंदूक़
लाइसेंसी
हो
लोग
कट्टा
ज़रूर
रखते
हैं
दिल
परेशान
तब
नहीं
करता
ख़ुद
को
जब
चूर-चूर
रखते
हैं
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Aatish Indori
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मन
बदल
देने
की
ताक़त
किसी
मंतर
में
नहीं
भूल
जा
तू
उसे
वो
तेरे
मुक़द्दर
में
नहीं
Aatish Indori
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हाँ
कभी
की
नहीं
जानाँ
ने
अधर
में
रक्खा
उम्र
भर
मुझको
मुहब्बत
के
सफ़र
में
रक्खा
उसने
हीरों
को
मेरी
राह-गुज़र
में
रक्खा
इसलिए
ख़ुद
को
सदा
मैंने
सफ़र
में
रक्खा
दिल
में
हालाँकि
जगह
दे
नहीं
पाई
लेकिन
उम्र
भर
उसने
मुझे
अपनी
नज़र
में
रक्खा
उम्र
भर
बन
के
किसी
और
की
रही
मनकूहा
उम्र
भर
उसने
किसी
और
को
घर
में
रक्खा
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Aatish Indori
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