किसी को याद तड़पाए तुम्हें क्या

  - Aamir Rahmati
किसीकोयादतड़पाएतुम्हेंक्या
कोईमरताहोमरजाएतुम्हेंक्या
तुम्हेंसजनेसँवरनेसेहैमतलब
क़यामतआतीहोआएतुम्हेंक्या
अनल-हक़कीसदादेतेहुएगर
कोईफिरसूलीचढ़जाएतुम्हेंक्या
तुम्हाराहुस्नयेहम-आशिक़ोंपर
ग़ज़बढाएसितमढाएतुम्हेंक्या
तुम्हेंतोखेलनाहोताहैदिलसे
किसीकीजाँचलीजाएतुम्हेंक्या
अदासशानोंपेगेसूबिखेरो
जहाँभरमेंघटाछाएतुम्हेंक्या
तुम्हाराकामछुपकरबैठजाना
किसीकीजाँ-ब-लबआएतुम्हेंक्या
निगहबानीमेंहो'आमिर'किसीके
करेंकुछभीयेहम-साएतुम्हेंक्या
  - Aamir Rahmati
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