ye sochna galat hai ki tum par nazar nahin | ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं

  - Aalok Shrivastav
येसोचनाग़लतहैकितुमपरनज़रनहीं
मसरूफ़हमबहुतहैंमगरबे-ख़बरनहीं
अबतोख़ुदअपनेख़ूननेभीसाफ़कहदिया
मैंआपकारहूँगामगरउम्रभरनहीं
हीगएहैंख़्वाबतोफिरजाएँगेकहाँ
आँखोंसेआगेउनकीकोईरहगुज़रनहीं
कितनाजिएँकहाँसेजिएँऔरकिसलिए
येइख़्तियारहमपेहैतक़दीरपरनहीं
माज़ीकीराखउलटींतोचिंगारियाँमिलीं
बे-शककिसीकोचाहोमगरइसक़दरनहीं
  - Aalok Shrivastav
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