mujhe sire se pakad kar udhed deti hai | मुझे सिरे से पकड़ कर उधेड़ देती है

  - Aalok Shrivastav
मुझेसिरेसेपकड़करउधेड़देतीहै
मैंएकझूटवोसच्चेसुबूतजैसीहै
मैंरोज़रोज़तबस्सुममेंछुपताफिरताहूँ
उदासीहैकिमुझेरोज़ढूँढ़लेतीहै
ज़रूरकुछतोबनाएगीज़िंदगीमुझको
क़दमक़दमपेमिराइम्तिहानलेतीहै
जोएकफूलखिलाहैसहरकीपलकोंपर
तुम्हारेजिस्मकीख़ुशबूउसीकेजैसीहै
वोरौशनीजोसितारोंकाख़ासज़ेवरहै
अमीक़आँखोंमेंअक्सरदिखाईदेतीहै
  - Aalok Shrivastav
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