manzil pe dhyaan ham ne zaraa bhi agar diya | मंज़िल पे ध्यान हम ने ज़रा भी अगर दिया

  - Aalok Shrivastav
मंज़िलपेध्यानहमनेज़राभीअगरदिया
आकाशनेडगरकोउजालोंसेभरदिया
रुकनेकीभूलहारकाकारनबनसकी
चलनेकीधुननेराहकोआसानकरदिया
पानीकेबुलबुलोंकासफ़रजानतेहुए
तोहफ़ेमेंदिलदेनाथाहमनेमगरदिया
पीपलकीछाँवबुझगईतालाबसड़गए
किसनेयेमेरेगाँवपेएहसानकरदिया
घरखेतगाएबैलरक़मअबकहाँरहे
जोकुछथासबनिकालकेफ़स्लोंमेंभरदिया
मंडीनेलूटलींजवाँ-फ़स्लेंकिसानकी
क़र्ज़ेनेख़ुद-कुशीकीतरफ़ध्यानकरदिया
  - Aalok Shrivastav
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