इकसमुंदरकीबहुतगहराईमेंउतराहूँमैं
इल्ममुझकोभीनहींकितनाअभीगहराहूँमैं
इनपरिंदोंसेतोरिश्ताबनगयाहैंऐसाअब
यूँँंँलगाहैलगनेशायदइनकाहीहिस्साहूँमैं
दिलनहींकरताकिसीसेबातभीकरनेकाअब
कितनीसारीबातोंकोदिलसेलगाबैठाहूँमैं
जोसजीबुक-शेल्फ़पररहतीअधूरीपढ़केही
उनकिताबोंकाहीइकखोयाहुआक़िस्साहूँमैं
अक्सहैपेश-ए-नजरतहरीरमेंमेरीतिरा
हरग़ज़लमेंनामओझलसातिरालिखताहूँमैं