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Prince
bataa kaise samjhte phir bhala ahl-e-jahaan tumkona tumko jaan paa.e prince tere jaanne waale
bataa kaise samjhte phir bhala ahl-e-jahaan tumkona tumko jaan paa.e prince tere jaanne waale | बता कैसे समझते फिर भला अहल-ए-जहाँ तुमको
- Prince
बता
कैसे
समझते
फिर
भला
अहल-ए-जहाँ
तुमको
न
तुमको
जान
पाए
प्रिंस
तेरे
जानने
वाले
- Prince
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रहते
थे
कभी
जिन
के
दिल
में
हम
जान
से
भी
प्यारों
की
तरह
बैठे
हैं
उन्हीं
के
कूचे
में
हम
आज
गुनहगारों
की
तरह
Majrooh Sultanpuri
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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पहले
लगा
था
हिज्र
में
जाएँगे
जान
से
पर
जी
रहे
हैं
और
भी
हम
इत्मीनान
से
Ankit Maurya
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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एक
मुद्दत
से
नहीं
देखा
है
ख़ुद
को
मैंने
इक
बुत-ए-आईना-सीमा
का
तलबगार
हूँ
मैं
Prince
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ख़ुदा
कुछ
हाल
कर
बेज़ार
ऐसे
अब
कि
मर
जाऊँ
अगर
जीता
रहा
तो
रोज़
मेरी
जान
जाएगी
Prince
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कि
मेरी
बे-ख़ुदी
का
मत
सबब
पूछो
कि
क्या
है
काफ़िरों
को
मत
ये
रब
पूछो
Prince
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अंदर
ही
अंदर
काफ़ी
उलझा
सा
हूँ
मैं
पर
देखने
से
सबको
सुलझा
लगता
हूँ
Prince
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मुझे
तुम
पूछते
हो
प्यार
क्या
है
बता
आख़िर
बला
ये
यार
क्या
है
कि
सारी
देखने
की
बात
है
बस
भला
गुल
और
फिर
यह
खा़र
क्या
है
कि
ख़ुदको
ज़र्फ़
वाला
मानते
हो,
बता
यह
पीठ
पर
फिर
वार
क्या
है
बता
कब
देखता
है
इश्क़
हालत,
भला
मुश्ताक़
या
बेज़ार
क्या
है
कहा
था
याद
आओगे
न
तुम
फिर,
ये
दिल
में
यार
हाहाकार
क्या
है
कि
ख़ुद
ही
कर
खफ़ा
वो
प्रिंस
हमको
वो
ख़ुद
ही
पूछते
हैं
सार
क्या
है
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Prince
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