वोग़ालिबकीग़ज़लजैसीकलाम-ए-मीरजैसीहै
कभीशीरींज़बाँसीहैकभीशमशीरजैसीहै
मैंअंदरसेबड़ाज़ख़्मीमगरबाहरसजन्नतहूँ
मियाँमेरीयहाँहालतउसीकश्मीरजैसीहै
मुझेइसज़िन्दगीसेभीनहींकोईगिलाशिकवा
दियाउतनामुझेइसनेमेरीतक़दीरजैसीहै
हक़ीक़ततेरेवादोंकीमुझेमालुमहैलेकिन
तेरेधोख़ेकीलज़्ज़तभीमेरीजाँखीरजैसीहै
सुनेइकबारजोतुमकोवहींपरबैठजाताहै
तेराहरलफ्ज़मस्जिदमेंहुईतक़रीरजैसीहै
तेरेअंदाज़पढ़पाऊंनहींकोईसुख़नवरमैं
तेरालहजाहकीमोकीलिखीतहरीरजैसीहै