buland hausale the aur jaañ fishaani thii | बुलंद हौसले थे और जाँ फिशानी थी

  - Mohammad Aquib Khan
बुलंदहौसलेथेऔरजाँफिशानीथी
बहुतहसीनहमारीकभीजवानीथी
वोएकदौरथाज़बउड़नेवालेघोड़ेथे
वोरोज़रातकोपरियोंकीइककहानीथी
इसीलिएभीमरासिमनहींबढेउससेे
बहुतहसीनथीवोऔरखानदानीथी
नयाहैदौरमगरलोगतोनहींबदले
वहीहमारीहैजो'कैस'कीकहानीथी
वोजिसग़ज़लपेमिरेहोंठकाँपतेहैंअब
कभीग़ज़लवोहमेंयादबाज़ुबानीथी
तुम्हारेबादतुम्हारीवोदिलपसंदफ़िलम
किसेदिखारहेहैंऔरकिसेदिखानीथी
बड़ोंसेगुफ्तुगूकाआजजोतरीकाहै
हमारेदौरमेंबूढ़ोसेबदज़बानीथी
जोएकशख़्सगयाहैछोड़करमुझको
उसीकेसाथहमेंज़िन्दगीबितानीथी
  - Mohammad Aquib Khan
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