azaad ho ke bhi jo biyaabaan men rahe | आज़ाद हो के भी जो बियाबान में रहे

  - Mohammad Aquib Khan
आज़ादहोकेभीजोबियाबानमेंरहे
फिरतोयहीसहीहैकेज़िन्दानमेंरहे
हममंचसेतुम्हारीउड़ाएंगेधज्जियाँ
हमशे'रवोनहींहैजोदीवानमेंरहे
इकज़लजलेकेखौफ़सेदेखोतोरातभर
ऊँचेघरोकेलोगभीमैदानमेंरहे
तुमदूरहोकेभीमेरेअरमानमेंरही
हमपासहोकेभीसफ़अनजानमेंरहे
माँकीतरहवतनभीहमेंयादआताहै
चाहेदुबईमेंयाकोईईरानमेंरहे
मैंइसलिएभीलौटगयातुझसेेहारकर
कोईतोचाहिएथाजोनुकसानमेंरहे
यूँँकोसकरउसरूहनेछोड़ाहमाराजिस्म
लानतहैइतनेसालजोबेजानमेंरहे
  - Mohammad Aquib Khan
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