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Zain Aalamgir
ghamgeen chehra dekh aaya main samandar men kahii
ghamgeen chehra dekh aaya main samandar men kahii | ग़मगीन चेहरा देख आया मैं समुंदर में कहीं
- Zain Aalamgir
ग़मगीन
चेहरा
देख
आया
मैं
समुंदर
में
कहीं
दुख
ये
निखरता
और
भी
पिछली
दफ़ा
से
देख
जब
- Zain Aalamgir
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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हर
दर्द
अपना
है
बना
तहरीर
काग़ज़
पर
यहाँ
खाए
बड़े
जो
दर्द
मेरे
बिन
कहे
ख़ुद
पर
सभी
Zain Aalamgir
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मलाल-ए-तर्क
निस्बत
का
कभी
रख
ना
सका
दिल
में
मुनासीब
है
नहीं
तेरी
जगह
दिल
में
किसी
को
दूँ
Zain Aalamgir
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जाकर
निहत्ता
जंग
में
भी
ये
क़लम
जीते
रियासत
कर
सियाही
को
सुख़न
Zain Aalamgir
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देनी
दुआएँ
छोड़
जब
सबने
मुझे
फिर
बद-दुआओं
पे
गुज़ारा
कर
रहे
Zain Aalamgir
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सब
याद
रहता
है
मुझे
ये
ज़ुल्म
भी
तारी
यहाँ
Zain Aalamgir
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