in bimaaron se kabhi tum us tarah se haal poochho | इन बिमारों से कभी तुम उस तरह से हाल पूछो

  - Zain Aalamgir
इनबिमारोंसेकभीतुमउसतरहसेहालपूछो
क्यूँँपूछेशख़्सकिससेेबात,उसकाहालपूछो
किससदीमेंहो,कहींभीख़ुश-गवारीनाउसेतो
भीगअश्कोंमेंकईदिनओरकितनेसालपूछो
ख़ुद-नुमाईकररहाहैशख़्सअबवोकुल्फ़तोंकी
वोनुक़ूशे-ज़ुल्मउसपरज़ारतारीजालपूछो
अश्कउतरेजोमिरेदिलकेमगरउसतर्ज़सेके
जिस्मअपनोंकामगरअनजानथीवोख़ालपूछो
दुश्मनोंसेमातखाईनाकभीउसनेमगरहाँ
देगएअपनेशिकस्ते-इश्क़,क्याख़ुश-हालपूछो
शख़्सकोउम्मीददिखलाईक्यूँपहलेकिसीने
मौतअव्वलरूहदेखे,जिस्मफिरबेहालपूछो
  - Zain Aalamgir
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